Sun meri devi parvat vasini aarti Lyrics🙏| देवी पर्वतवासिनी आरती

Sun meri devi parvat vasini aarti lyrics with hindi meaning | सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी आरती in हिंदी | मैहर माता की आरती 🙏

Sun meri devi parvat vasini aarti

जय माता दी दोस्तों। सुन मेरी देवी पर्वत वासिनी आरती के लिरिक्स पेज पर आपका स्वागत है। माता रानी का यह भजन काफी लोकप्रिय माना जाता है और यह भजन पहाड़ों में बसने वाली हमारी सभी देवी माताओ को समर्पित है। दोस्तों, आपको यहाँ इस पेज पर ना सिर्फ माता का यह अद्भुत भजन मिलेगा वल्कि इस भजन को ठीक तरह से समझने के लिए विस्तृत और सुसज्जित रूप से संजोया गया इस भजन का शब्दिक अर्थ भी मिलेगा। पहाड़ों में बसने वाली हमारी माता रानी की यह आरती वेसे तो मध्य प्रदेश के ऊँचे पहाड़ों में बसने वाली माता मैहर के गुणगान के लिए जाना जाता है मगर इसके बोल पूरे भारत में सभी देवियों की अनूप सुंदरता और अचंभित कर देने वाली उनकी लीलाओं का वर्णन करती है।


Sun Meri Devi Parvat Vasini Aarti Lyrics:


सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी,
तेरा पार न पाया माँ।
👉अर्थ:
(हे पर्वतों में रहने वाली माँ, कोई भी आपकी पूरी महिमा और शक्ति को समझ नहीं पाया है।)


पान सुपारी, ध्वजा नारियल,
तेरी भेंट चढ़ाया माँ॥

👉अर्थ:
(माँ, मैंने आपको पान, सुपारी, ध्वज (झंडा) और नारियल जैसे पूजा के सामान अर्पित किए हैं।)


सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी,
तेरा पार न पाया माँ।

👉अर्थ:
(हे पर्वतों में रहने वाली माँ, कोई भी आपकी पूरी महिमा और शक्ति को समझ नहीं पाया है।)

सुहाग चोली तेरी अंग विराजे ।
केसर तिलक लगाया माँ ॥

👉अर्थ:
(माँ, आपने सुंदर सुहाग वाली चोली पहनी हुई है और माथे पर केसर का तिलक लगाया हुआ है, जिससे आप बहुत दिव्य और सुंदर लग रही हैं।)


सुन मेरी देवी पर्वतवासनी ।
तेरा पार ना पाया माँ ॥

👉अर्थ:
(हे पर्वतों में रहने वाली माँ, कोई भी आपकी पूरी महिमा और शक्ति को समझ नहीं पाया है।)


नंगे पग तेरे द्वार पे आकर,
चरणों में शीश झुकाया माँ॥

👉 अर्थ:
(मैं बिना जूते-चप्पल (नंगे पैर) आपके दरबार में आया हूँ और आपके चरणों में सिर झुका कर प्रणाम किया है।)


सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी,
तेरा पार न पाया माँ॥

👉अर्थ:
(हे पर्वतों में रहने वाली माँ, कोई भी आपकी पूरी महिमा और शक्ति को समझ नहीं पाया है।)


ऊँचे-ऊँचे पर्वत तेरे,
नीचे धाम बसाया माँ,
दूर-दूर से भक्त जो आवें,
सबको तूने अपनाया माँ॥

👉 अर्थ:
(माँ, आपके मंदिर ऊँचे पर्वतों पर हैं और नीचे आपका धाम बसा है। दूर-दूर से आने वाले सभी भक्तों को आप प्रेम से अपनाती हैं।)

Devi Parvat Vasini Aarti
       *यह परिद्रश्य मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में स्थित खनियाधाना कस्बे के पास सुप्रसिद्ध बीजासन माता के मंदिर
        (जिसे कदवाया माता का मंदिर के नाम से भी जाना जाता है )से लिया गया है।*


सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी,
तेरा पार न पाया माँ॥

👉अर्थ:
(हे पर्वतों में रहने वाली माँ, कोई भी आपकी पूरी महिमा और शक्ति को समझ नहीं पाया है।)


सतयुग, द्वापर, कलयुग में भी,
तेरी महिमा न्यारी माँ,
दुखियों की तू कष्ट हरनिया,
भक्तों की रखवाली माँ॥

👉अर्थ:
(माँ, हर युग (सतयुग, द्वापर, कलयुग) में आपकी महिमा अलग और महान रही है। आप दुखियों के दुख दूर करती हैं और अपने भक्तों की रक्षा करती हैं।)


सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी,
तेरा पार न पाया माँ॥

👉अर्थ:
(हे पर्वतों में रहने वाली माँ, कोई भी आपकी पूरी महिमा और शक्ति को समझ नहीं पाया है।)


जो भी सच्चे मन से ध्यावे,
मन की मुरादें पाए माँ,
तेरी कृपा से जीवन उसका,
सुख-समृद्धि से भर जाए माँ॥

👉 अर्थ:
(जो भी सच्चे दिल से आपकी पूजा करता है, उसकी इच्छाएँ पूरी होती हैं। आपकी कृपा से उसका जीवन सुख और समृद्धि से भर जाता है।)


सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी,
तेरा पार न पाया माँ॥

👉अर्थ:
(हे पर्वतों में रहने वाली माँ, कोई भी आपकी पूरी महिमा और शक्ति को समझ नहीं पाया है।)


धूप दीप नैवैध्य आरती ।
मोहन भोग लगाया माँ ॥

👉अर्थ:
(माँ, मैंने धूप, दीप (दीया), नैवेद्य (भोग) और आरती के साथ आपको स्वादिष्ट भोजन (मोहन भोग) अर्पित किया है।)




ध्यान भगत मैया गुन गाया ।
मनवंचित फल पाया माँ ॥

👉अर्थ:
(हे माँ, भक्त ध्यान लगाकर आपके गुण गाते हैं और उन्हें अपनी मनचाही फल (इच्छाएँ) प्राप्त होती हैं।)


सुन मेरी देवी पर्वतवासिनी,
तेरा पार न पाया माँ॥

👉अर्थ:
(हे पर्वतों में रहने वाली माँ, कोई भी आपकी पूरी महिमा और शक्ति को समझ नहीं पाया है।)



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